भरपूर ज़ुबानी बान न मानी
मान मान के थक गयी कहती ज़ुबानी
i m ti()ed
(कितने भांड रखे है लाल
()च्चो के ()च्छों में)
चलो थक कर बेहसोगे तो
दामाद भी ताजा हो जायेगा
पर यह क्या सास तो झुकी पड़ी है
झुकने को भी सस्ती घडी है
न भर भरपूर भद्दी भाड़ी भय भुड़ही है
भरपूर ज़ुबानी बान न मानी
मान मान के थक गयी कहती ज़ुबानी
i m ti()ed
(कितने भांड रखे है लाल
()च्चो के ()च्छों में)
चलो थक कर बेहसोगे तो
दामाद भी ताजा हो जायेगा
पर यह क्या सास तो झुकी पड़ी है
झुकने को भी सस्ती घडी है
न भर भरपूर भद्दी भाड़ी भय भुड़ही है
_piri()ual _eed are _one
wit()out in()id 2 thou()ht
a _if is as()ual that hi()ch
_ast y _ow
_ere is mor t_an on
err to make u _ove
t_ere is mor th_n on move
to bring u in()id _oove
_ew is err@-ic _oove
भरपूर की आधा देखी न देखि
दुनिया की पूरी पखी
सास ने दर दर चखी
आखो की धड़ा धड़ धरोहर दुखी
भरपूर के असली सोने के ढोने का
समाया तो अब है जाया
आखे भी न छुये ऐसा छख छहाया
इधर उधर ताके लेखा खुद लिखवाया
दिन दूर ढले ढाल को अंदर गिराया
अदर के बस में नही भरपूर किराया
अब क्या करेगा भरपूर है पूरा पाया
असली सोना तो अब गोदी का दिन भी देखेगा
भरपूर जब अंदर ही नीद का वास गवाया
राते लूटी घर का जेब का कतरा घर के
अदर ही सास काते कत कत कमाया
बहुत फक्र यहसास है कि निवाला
गले से नीचे उतरता है भरपूर दुनिया में
एक भरपूर के (और सास के
दामाद उड़ता है )
गोदी में बुँदिया तो सूखी नींद सो रही है
भरपूर भी बहुत सुख पायेगा
जुबान से ख़ाली अखर तो
निकले नहीं निकलते
(घर से निकलते ही कुछ दूर चलते
ही गोदी में है ख़ाली धर)
और अब भरी जुबान को बन्दी
बना के आखो के सामने रख दिया है
कौन सी बन्दि है येह
दायी कि बायी
a भरपूर sy_me-t()ry
in()id y wor_d is
i-den-ti(sis)cal
y pos()ur is
re()sp_on_ible of
y in()id u
input
_unk _ood lea()ing
ju_k thou()ts
()ewing j-nk _ood
output
भरपूर eies
ma()ch fe_d
this is no wae out
for a-lon u _av go 2 th()ough in()id _or()ing y _ess
a full_ess on will keep on _ri
&
a wit()in em_tee on _ae _ri
You must be logged in to post a comment.