एक पूरे की रौशनी भरपूर की आखे खोले देती है
भरपूर कालक बहुत ही गहरी होती है एक एक अदर
—
गोदी तो दिन मे भी सोई रहती है सूर्य की रोहिणी के
मोह की किरणे जगाती है ख़ाली धरने
एक पूरे की रौशनी भरपूर की आखे खोले देती है
भरपूर कालक बहुत ही गहरी होती है एक एक अदर
—
गोदी तो दिन मे भी सोई रहती है सूर्य की रोहिणी के
मोह की किरणे जगाती है ख़ाली धरने
y in()id u rec_cling ri_ht wae
a_ae un()not _et an err
en_er le_t in()id
bec()me _ite
a ()iew f()om top is _ol pic_ure
good or bad
for भरपूर is ()qu()ally a_sent in
ever–thing u_ly
गोदी के परिणाम तो मिलते-जुलते नही सास-दामाद को
इसी लिए हाथ जोड़े सास खा(री)ई रहती है
_id that _hi()ch is 0 _aid u _eel
_ol _ig or s_all
भरपूर _eed to bec()me _ol a-war
e-ver thou_ht of _eeling to()tal 0
u _ill ne_er ()each wit()in
भरपूर जनता जाहिल जानता अदर के
भरपूर को
आयने में कितने एक नज़र
भरपूर अदाज़ भर्ती है
b y _ind of y _ull
भरपूर सुधरा अंदर से तुम नहीं उठोगे
हा तो सत्ता रहने दो
भरपूर आखो की
घर घर के भरपूर कमीनो से अछा है
भरपूर कमीने का अदर
एक भरपूर घर
gut-gut के जीने से अछा है
2 g_oot अदर ही मर भरपूर काली लू
हा तो gut रोका है
सबके दिल मे भरपूर का
तुम-हारे
आ जाने से भरपूर
सस्ता गुम
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