y in()id u @er _not no adhe
आखे भी थर थर्रायेगी उठे न
भरपूर भाड़े के अदर बाधे
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आखे भी थर थर्रायेगी उठे न
भरपूर भाड़े के अदर बाधे
ne*t s_op
_ean-er _outh
मनुष्य ने अपने स्वस्थ्य को
सवा(भरपूर)अस्थ
अदर का स्वाभिमान बना रखा है
अब अस्थिया तो विरा()मान
होगी ही
y in(out)id u 100%
is
a-lon u wit()in .01%
th@ an end this is beginning
is ever- -thing fullness in(out)id
end is emptee nothing
खुद से ही दूर होजा मनुष्य
कोई नहीं तेरा अंदर शिष्य
भरपूर विष तेरा पूरा वैदुष्य
कैसे करेगा ख़ाली अंदर विषय
भरपूर सोने से तूतू में में की दुनिया सोना है
उगलती है
उठाती उंगली gut गोदी के अंदर
मेरे देश के धरती
सोना उगले उगले हीरे मोती
धरती के देश पूरे नियंत्रण करके लगे है
लदने में व्यस्त सोने के लिए
अब लातो को भी याद नहीं रहता
भरपूर दिन भरपूर रात से ma()ch करते है क्या
दिन की _er_ing ३ है तो रात की भी ३ ही होगी
बहार ले परिणाम अंदर लेन-देन से क्या फायदा
पहले अंदर के किले की हार-जीत को परखो
यह तो किसी ने धरा ही नहीं आज तक
पार हार-जीत से भी की होगा
अब इधर उधर की तूतू में में की यारी को ही ले लो
क्या फैला रही है गोदी में
अपनी बीमारी को कैसे बैठाना है यह तो सास के दामाद को खड़ा होना है
भरपूर बीमा(या)रियो की सेवाओं में उपस्थित होके भरपूर को ऊँचा दिखाना है
घर के अंदर इसी लिए यारीया भी गहरी डूबी हुई है
तल के चमड़ी पर तो पूरी चमक है
इसका बल मत बीमा पक्का है
चालीस चोरो ने एक बाबा का सारा सड़ा हुआ तेल पी लिया
उससे क्या होगा बाबे के बाबायो का
भरपूर नाम रोशन हुया
बेताल और बाबा का ma()ch कैसा रहेगा
अंत तो ख़ाली ही है न अंदर
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