रफू धक्कार

मां तो कभी खफा नहीं होती
भरपूर से

तो तुम क्यों नहीं दफा होते


तूतू मे मे की दुनिया के एक-एक के

अदर से

वेहला सास जगल मनाये मगल

Published by

Unknown's avatar

mandalalit

to be a within 0-one-0 is to breathe for gut alone total mother nature

Leave a comment