भरपूर दि-खा

बहुत ऊचा भाग्य है एक का तूतू मे मे के अदर


अपवित्र ने अदर ज़ुबान से भरपूर चुना है


असुर ने अदर कान से भरपूर सुना है


सास ने अदर ही भरपूर भुना है


दामाद तो बस भरपूर ही

भरपूर अदर बुना है

ओहो आखे तो रही गयी

भरपूर दिखती रहेगी

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mandalalit

to be a within 0-one-0 is to breathe for gut alone total mother nature

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