अपवित्रता सब को एक ही नज़र से देखती है
एक-एक बराबर वाले ही होते है
अपवित्रता बराबरी नही करती
उसमे क्या क्यो है
भरपूर का तो काम ही एक है
बुरा बान का भा()प
अपवित्रता सब को एक ही नज़र से देखती है
एक-एक बराबर वाले ही होते है
अपवित्रता बराबरी नही करती
उसमे क्या क्यो है
भरपूर का तो काम ही एक है
बुरा बान का भा()प