उप-साज

भरपूर अपवित्रता अपने आप ही असुरो के अदर हरी जाती है


अपवित्र सरलता से परिवार की सस्कार भी भरपूर पवित्र धोते है


भरपूर सच मीठी बात है जो अदर अपवित्रता का घोल उपवास है

हमेशा से ही बिना पहचाने अदर छिपे राज अपवित्र पूजते साज

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mandalalit

to be a within 0-one-0 is to breathe for gut alone total mother nature

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