मनुष्य अपना प्राप्तव्य अर्थ प्रपात कर ही लेता है
और उसके लिए उसे घर को बाहर निकालना होता है
इसी लिए घर को अदर बिठाने से भरपूर प्रापत भरपूर ही होता
मनुष्य अपना प्राप्तव्य अर्थ प्रपात कर ही लेता है
और उसके लिए उसे घर को बाहर निकालना होता है
इसी लिए घर को अदर बिठाने से भरपूर प्रापत भरपूर ही होता