काल कनुकान

घर के अदर तो मरे हुये शरीर को रखते है
बाहर तो आत्मा को भी कोई नहीं मार मुक्ता


सास तो अपने निर्धारित नमय ने नई नाल नही

इसका अनुमान कोई भी नही लगा सकता
अदर-बाहर

अब अपने नरपूर नाम नदलो

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यहा पर पहरा बहुत कोडा है
बाहर निकलना तो आसान है
लेकिन अंदर आना बहुत मुश्किल है
बिना बताये थोडी आ सकते अदर
अदर वाला न सुने अख(बे)बार
आप न त्यार होना चमत्कार
पहले पहल पायो पराया पल


dual rit
privy brite
wry nit
let’ lit

बत्तियायो

दूयीया का स्मा(दा)ज ही मा-बाप बहिन-भायी
और बच्चो के मरने की धमलिया धारता
तुम्हे तो

गोदी के अंदर

यह सब कुछ अछा आता आ

हमारे बचे क्या तुम्हारे कहने पर ही मा—रेगे

उ()फ उया किया

जब घर की जिदा लाशो की सफाई नही इतनीअदर प्यारी

तो हस-पताल मे क्या भरती मुरदा शरीरो की शायरी

hi बीमा(या)री hi बीमारी hi बीमा(या)री

आना तो है यही बू-ढा शरीर भारी

और जवान है नर की जू-बान अदर उडारी