आधे प्रदान

अलख निरंजण
सृष्टि गोदी का अन्न-जण निराकार


भिक्षां देहि भिक्षां देहि भिक्षां देहि


हे अन्नपूर्णा देवी


आधे को गोदी नंदन के लिए


गोदी उद्धार आदान कीजिए

बत्तियायो

दूयीया का स्मा(दा)ज ही मा-बाप बहिन-भायी
और बच्चो के मरने की धमलिया धारता
तुम्हे तो

गोदी के अंदर

यह सब कुछ अछा आता आ

हमारे बचे क्या तुम्हारे कहने पर ही मा—रेगे