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केवल्य आधे
ॐ(काल) आधे
शून्य आधे
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केवल्य आधे
ॐ(काल) आधे
शून्य आधे
दूयीया का स्मा(दा)ज ही मा-बाप बहिन-भायी
और बच्चो के मरने की धमलिया धारता
तुम्हे तो
गोदी के अंदर
यह सब कुछ अछा आता आ
हमारे बचे क्या तुम्हारे कहने पर ही मा—रेगे
आधे को तो अंदर जनता नहीं त्यार
फिर कौन दिखाये आधा कब्र है बेकरार
आधे
कीटा-नुयो के अदर से अणुओं
को अंदर-बाहर निकालता
इससे किता को तो
तकलीफ ताजी
आजी
द्वापर के कृष्णा के 16००० रूप
एक-एक पूर्ण अंदर भूप
राधे के लिए ख़ाली बाँसुरी
अंतर्मन स्वरुप
हम है सृष्टि गोदी के ऋणी
हमारी आज़ादी है गोदी की ध्वनि
गोदी ने दी है हमें ख़ाली मणि
मिट्टी का घड़ा ख़ाली सुराही
शरीर का सड़ा सारा स्वाही
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u _ill ne_er wi_ness in()id 2tal se*ee
सम्पूर्ण स्माधि
धन्य देवी धन्य देवी धन्य देवी
धन्य सृष्टि धन्य गोदी धन्य बुँदियाँ
आधे अंदर-बाहर
पूर्ण प्रणाम
यह भरपूर तो लगता है बडा बडा बाया
ख़ाली कार्य को भी मात मेगा
ctrl+ is sel_-lo_se in
_his hous
अभी तो गोदी मईया ने आधे आज
अहा भेजा
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