भरपूर सपने सच सुये
रातो के भरपूर जग जुये
बाहर भरपूर दिन दूजे डु()ये
अदर अधरम चाद चुगे
भरपूर सपने सच सुये
रातो के भरपूर जग जुये
बाहर भरपूर दिन दूजे डु()ये
अदर अधरम चाद चुगे
सूर्यास्त पूर्ण साँसे मस्त
शाम घुले अंदर जबरदस्त
धारे धरे तमाम हाथा हस्त
शय्या में साँसे हम बंदोबस्त
जो सासे रोक अदर रुकता
वोह पूरी दूयीया का डुबो
gut अदर खाली दौडता
किसका साथ चूमता
यह दूयीया की सासे क्या लिखती है
हम बने तुम बने एक दूजे के लिये
तो ख़ाली बल मत
हम एक है — तुम दूजे हो
तुम नक-भी नेक नही नो
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let’s la_y lo_t
दरवाजो की लाड़ी लकड़ी
गूंजे गली जाल जगजड़ी
गोदी आन म्यानि मकड़ी
खाला खू()ले ख़ा()ली खकड़ी
an emptee in()id breathing
a total peace of mother
nature’s wiw o
emptee arth
तूतूमैमै जुबान की कीमत
chan_ing out 1 ins_ant
not in()id s_able cons_ant
_ol out t_ouble in()id ten_
u pae al1 in()id _ent
not _ile s_ent
s_or-y of in_an
kee_ sin_ing y _an
y-0-s in()id g_in
out-p() _an
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