अपनी मा की कोख से
चुप चाप बाहर निकले
बिना आखे झपके फिसले
और
भू की कोख से क्या लेके
असुर आये
जुबान के समाज की
दुयीया दा दवारा दाज
अपनी मा की कोख से
चुप चाप बाहर निकले
बिना आखे झपके फिसले
और
भू की कोख से क्या लेके
असुर आये
जुबान के समाज की
दुयीया दा दवारा दाज