जुबान का समाज करता पूरा राज
बनता है सृष्टि गोदी बुँदियों का सरताज
कान और आखे फिराये दामाद काज
इधर उधर जो भी वार सामने आये
हो सारा बरबाद बचे बर-बा आवाज
फिर बाद का बर आमने लिहाज
जुबान का समाज करता पूरा राज
बनता है सृष्टि गोदी बुँदियों का सरताज
कान और आखे फिराये दामाद काज
इधर उधर जो भी वार सामने आये
हो सारा बरबाद बचे बर-बा आवाज
फिर बाद का बर आमने लिहाज