अपने ही gut के दौड़ाये दुश्मन
बीमारियो के नाते उचे बधन
इधर उधर से लाये खिचे तन मन
दमाद से न उतरे भरपूर बन ठन
आ गयी है बाते करने समधन
अपने ही gut के दौड़ाये दुश्मन
बीमारियो के नाते उचे बधन
इधर उधर से लाये खिचे तन मन
दमाद से न उतरे भरपूर बन ठन
आ गयी है बाते करने समधन