अपने ही gut के दौड़ाये दुश्मन
बीमारियो के नाते उचे बधन
इधर उधर से लाये खिचे तन मन
दमाद से न उतरे भरपूर बन ठन
आ गयी है बाते करने समधन
अपने ही gut के दौड़ाये दुश्मन
बीमारियो के नाते उचे बधन
इधर उधर से लाये खिचे तन मन
दमाद से न उतरे भरपूर बन ठन
आ गयी है बाते करने समधन
बुँदियों को करे बदनाम
सास के अदर सीना तान
बहरा बिकायू बूढ़ा बान
हाथो मे समाज की जान
भरपूर दिखाए ये पहचान
प्रकृति के नियमो का पालन कैसे करोगे
जब जुबान का समाज न अंदर
आने दे ख़ाली आज
शीशे समझे साँझ का साज
ख़ाली हो आज का राज
समाज ने सिखाया सडना
यह तेरा यह मेरा झेल झडना
दूयीया का नक्शा पूरा पडना
जुबान जिया झाड जडे झरना
ਇੱਜਤ ਦੀ ਕੀ ਕੀਮਤ
ਅਖਾ ਵਢ ਕੇ ਰਖ ਦਇਗੀ
ਸਮਾਜ ਦੀ ਭਰਪੂਰ ਜੀ ਮਤ
ਅਦਰ ਬਾਹਰ ਜੁਬਾਨ ਜੋਤੇ ਜੀ ਸਤ
ਭਗਵਾਨ ਦਾ ਸਵਾਰਿਆ ਸਵਾਰ
ਸਮਾਜ ਅਧੂਰਾ ਨਹੀ ਜਿਮੇਵਾਰ
ਹੱਥੇ ਨਾ ਜਾਰ ਜੁਬਾਨ ਜਾਨਦਾਰ
ਪਹਿਨਾਯੋ ਹੱਥਕੜੀ ਮਾ ਦਾ ਸਾਰਾ ਸਾਰ
ਨਾ ਰਹੇ ਅਦਰ ਖਾਲੀ ਭਰਪੂਰ ਹਰ ਵਾਰ
ਮੈ ਆਪ ਹੀ ਸਾਬ ਲੂ
ਜਮੀ ਜੁਬਾਨ ਦੇ
ਸਮਾਜ ਦੀ ਮੌਤ ਤੇ ਸਾਬ ਨਹੀ ਜਾਦੀ
ਤੇ ਜਨਮ ਦੇ ਜਰੂਰੀ ਜਾਹਿਰ
ਸਾਬੇ ਆਦੇ
ਕੁਬਾਨ ਕਦੋ ਕਮੀ
जीव जन्तु
नहीं किन्तु परन्तु
निभा अदर जैसा जन तू
नही तो भर भारी भरकम भू
उधर धूप इधर छाया
आधा पुत्र पूरा पराया
पार अधेरा आर आया
किसकी राखी रात किराया
for rakesh sharma
dr singh (aias did offer special course price) has all updates of
previous happenings
for rakesh is unaware
has to come to hoshiarpur
to get present states
for mandalalit’ fate
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