सां()ती

गोदी की शांति क्या तूतूमैमै मांगती

क्यो नही चुप बैठे सीमा ध्यानती

घर घूमने का रस रोज सभालती

मुखोटो की खोट बखूबी पहचानती

स-ताज

जुबान का समाज करता पूरा राज

बनता है सृष्टि गोदी बुँदियों का सरताज

कान और आखे फिराये दामाद काज

इधर उधर जो भी वार सामने आये

हो सारा बरबाद बचे बर-बा आवाज

फिर बाद का बर आमने लिहाज

कम-आयी

हमारी आन की ना करे भरपायी

दूयीया की कमायी पूरी हाथापायी

वो क्या साथ निभाये तडपी तरपायी

चाव चूर चडने चली ()चारी मायी

देवियाँ

देवियाँ नहीं जोड़ती ख़ाली हाथ

मिलालो आधा जन्मो की पूरी सास

शक्ति को दागे बिंदी से दूर भागे

सास बाटे आधा अधूरा साथ

साँसो की दौड़ती दात सारा

पाना to()tal देवी के हाथ

a wor_d not _ur

y _iv wor_d is a creation of

a _as-cu_line ton_ue’ in()id society’

failing th@ _hi-ch is pa_t 1 _ill

be forever @ war wit_ present

now for society’ present benefit

will de_t_oy planets res()ces

&

(un()ess that which is either 1 or 0 will emptee of di_eases in()id gut)

_eep _aeing

not p() f_om m-p_ty cup

now w_@ is le_t _rom planet’ em_tee cu_

rit up