b से बडा बरपूर प्यार

शाति बायी को है बेसबरी बी से इतजार
कब आधे घर से बाहर निकले
सुने फटे फाल फटकार

ओ भगवन अब क्या यहा पर
भी आधा दिक-टेटर त्यार

चली आधे ख़ाली कब्र आर पार

आधे साँसो की हो रही नीलामी
नरकासुर के अदर नही है कोयी उलामी
खूले-आम होगी अब तो बदनामी

अपनी कोख के अदर बाहर सब करते
li_e & dis_ike

6 कानो को सीखा रहा है कब से
लेकिन कभी जुबान ने होने नही दिया पार पडपे

u _ar o_d he_l_ in()id (he)e_en

_um1 is _acking ne_wo_k

सिलसिला

देवी की गुफा में दी(तुम)वारे नहीं होती
कोख ख़ाली खो देती

इसमे देवी की मर्जी के बगैर
कोई अंदर नहीं आ सकता

आप को किसका शरीर मिला
औरत का या मरद का

अदर क्या किला

फैलायो फेरा hy_enic

हमारी साँसो के काल के कम से
आप किसकी मरहम पे पट्टी पडे

मेरे घर मे bi-n हम लगाते
तेरे ताड ते फेक फाते
समाज साडा सुदर सताते
फिर b-in क्यो छुपाते

गोदी की मिट्टी की ख़ाली धूल से कितनी की-मारिया कैलती

और समाज की तूतू मै मै घर अदर कमरो के b-स्तर ताज तैरती

so()cial dis_ance h_gene

समाज की मजबूरी की दूरी
घर के अदर नही जरूरी

e_ec_ric ऊर्जा

तुम साथ मे ख-डे होना तो क्या
दूर से भी आखे उठायोगे

तो गोदी की ज़मीन जेगी

शुन्य vo_t के झटके झट(से-गई)गी

म्यू महसूस महि मुया मटकी

पेरो की पडपूर पमीन पिसक पयी